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श्रीमती अल्पना सिन्हा,
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निर्माण श्रमिकों के लिए विशिष्ट अधिनियमों की आवश्यकता

यद्यपि निर्माण श्रमिकों के लिए एक सामान्य श्रमिक के रूप में केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा निर्मित विभिन्न कानून पूर्व से प्रभावशील थे तथापि निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा, कल्याण तथा विश्ष्टि स्वरूप की सेवा-शर्तो को विनियमित करने की दृष्टि से परिपूर्ण अधिनियम बनाने की आवश्कता अनुभव की गई। इस संबंध में राज्य के श्रम मंत्रियों के ४१वें सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि निर्माण श्रमिकों के लिए विश्ष्टि कार्यदषाऍ, कल्याण तथा सुरक्षा संबंधी प्रावधानों को विनियमित करने हेतु पृथक से विश्ष्टि अधिनियम बनायें जायें। इसी निर्णय के परिपेक्ष्य से भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा-शर्तो का विनियमन) अधिनियम, १९९६ को संसद द्वारा पारित किया गया तथा महामहिम राष्ट्रपति द्वारा दिनांक- १९ अगस्त १९९६ को अभिस्वीकृति दी गई। इस प्रकार निर्माण श्रमिकों को उपयुक्त कार्यदषाऍ, कार्य के दौरान सुरक्षा तथा समाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दृष्टि से केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष १९९६ में निम्न दो अधिनियम प्रभावषील किये गयें:-

 

(१) भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन एवं सेवा-शर्तो का विनियमन) अधिनियम, १९९६
(२) भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण उपकर अधिनियम, १९९६

 

     उक्त प्रथम अधिनियम के अंतर्गत निर्माण श्रमिकों की सेवा-शर्तो तथा उनकी सामाजिक सुरक्षा के संबंध में कल्याणकारी योजनाऍं प्रवर्तित करने के प्रावधान हैं तथा निर्माण श्रमिकों को विभिन्न कल्याण योजनाओं के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से बोर्ड के गठन का प्रावधान है। जबकि द्वितीय अधिनियम में राज्यों में संचालित निर्माण कार्यो से बोर्ड की निधि के लिए उपकर प्राप्त करने का प्रावधान है। बोर्ड द्वारा प्रथम अधिनियम के अंतर्गत निर्माण श्रमिकों का निबंधन कर उन्हें विभिन्न योजनाओं के हितलाभों से संरक्षण प्रदान किया जाता है।